एक दोस्त ने कहा तू शादी किससे करेगा,
मैंने उससे कहा मैं शादी शुदा हूँ,
कहने लगा कौन है तेरा जीवन साथी,
मैंने कहा यादें हैं किसी की,
उसने पूछ किसने पढाया था निकाह,
मैंने कहा मुस्तक़बिल के खवाबों ने,
वो बोला कैसी गुज़र रही है ज़िन्दगी,
बोलने वाला था पर आंसू छलक पड़े,
वो बोला फिर उसे छोड़ क्यूं नहीं देता,
मैंने कहा हक-मेहर में मेरी ज़िन्दगी लिखी है !
मैंने उससे कहा मैं शादी शुदा हूँ,
कहने लगा कौन है तेरा जीवन साथी,
मैंने कहा यादें हैं किसी की,
उसने पूछ किसने पढाया था निकाह,
मैंने कहा मुस्तक़बिल के खवाबों ने,
वो बोला कैसी गुज़र रही है ज़िन्दगी,
बोलने वाला था पर आंसू छलक पड़े,
वो बोला फिर उसे छोड़ क्यूं नहीं देता,
मैंने कहा हक-मेहर में मेरी ज़िन्दगी लिखी है !



