"Falak Ko Zidd Hai Jahan Bijliyaan Giraane Ki............. Hume Bhi Zidd Hai, Wahin Pe Aashiyaan Banane Ki........" तुम्हें जब मिले कभी फ़ुर्सत मेरे दिल से बोझ उतार दो, मै बहुत दिनों से उदास हूं मुझे भी कोई शाम उधार दो....!
Wednesday, November 18, 2009
जल गया आशियाँ......!!
Monday, October 12, 2009
***तुम्हारी फितरत***

Thursday, August 6, 2009
बेवफा जिंदगी

में तुम्हारे बगैर ही जी लूँगा,ये दुआ बद दुआ सी लगती है,
नाम इस का लिखा है आँखों पर, आँसू की खता सी लगती है,
वोह अभी इस तरफ़ से गुजरी है, ये ज़मीन आसमान सी लगती है,
प्यार करना ही जुर्म है शायद, आज दुनिया खफा सी लगती है,
ज़िन्दगी एक खौफ सा तारी है, तेरी यादों का एक अजाब सा जारी है,
भुलाना तुझे इस कदर नही है आसन, एक उमर तेरे नाम पे गुजारी है,
थक कर बैठा है यहाँ कौन भला, ख्वाहिशों का सफर अभी जारी है,
लग कर दीवार से निढाल सा बैठा,
Sunday, July 5, 2009
***मेरी कब्र***

मेरी कब्र पे आके तुम आवाज़ नहीं करना
दर्द की नई दास्ताँ का आगाज़ नहीं करना,
अपनी बेबस्सी को खुद ही बयान करेगी यूं,
चेहरे को किसी आईने का मोहताज नहीं करना,
राज़ जो खुद से ही ना छिपा पाओगी तुम,
ऐसे राज़ मे किसी को हमराज़ नहीं करना,
नामुमकिन है हकीकत के आसमान मे उड़ना,
खाबों के सहारे इसमें परवाज़ नहीं करना,
ज़ख्म फिर ज़ख्म हें इक रोज़ भर जायंगे,
हुश्न वालों को इनके चारासाज़ नहीं करना,
खाख से बनी हो खाख मे मिल जाओगी,
कभी भूले से भी खुद पे नाज़ नहीं करना....!
Friday, June 5, 2009
Thursday, May 7, 2009
***जनाज़ा****

जब जनाज़ा उठाया जायेगा मेरा उदासी का मंज़र होगा,
कब्र ही मेरी मंज़िल होगी और कब्र ही मेरा घर होगा,
फिर डाल देंगे कब्र में मुझे और मिट्टी में सुला देंगे,
ऐसे होंगे मेरे चाहने वाले मेरे आखरी वक़्त में ये सिला देंगे,
सब रिश्ते दुनियां तक के ही हैं कोई साथ निभाता नहीं,
भूल जाते हैं कुछ ही दिनों में कोई मिलने आता नहीं........
Monday, May 4, 2009
*****झील की गहराई*****
ख़ुद अपने लिए बैठ कर सोचेंगे किसी दिन,
यूँ है के तुझे भूल के देखेंगे किसी दिन,
बैठ के ही फिरते हैं कई लफ्ज़ जो दिल मैं,
दुनिया ने दिया वक्त तो लिखेंगे किसी दिन,
जाती है किसी झील की गहराई कहाँ तक,
आँखों में तेरी डूब कर देखेंगे किसी दिन,
खुसबू से भरी शाम मैं जुगनू के कलम से,
इक नज़्म तेरे वास्ते लिखेंगे किसी दिन,
सोयेगे तेरी आँख की खुलावत मैं किसी रात,
साए में तेरी जुल्फ के प्रियराज जागेंगे किसी दिन .......
Thursday, April 23, 2009
हसीन ख्वाब...........!!!

आइना-ए-दिल में तस्वीर रहती है तेरी ही ए-हमनशीं,
आँखें खुलते ही कहीं भूल ना जाना मुझको ए-पर्दानशीं,
जो आ गया सामने कभी तो कैसे पहचानेगी तू मुझ को,
अपने सीने से लगाए रखना आँखों में बसाये रखना,
आज ख़्वाबों में आया हूँ कल जिंदगी में भी आऊंगा,
आज जा रहा हूँ सिर्फ इज़हार करके इकरार के इंतज़ार में,
Saturday, April 4, 2009
***यह हाल तुम्हारे बाद हुआ***
इस शहर में कितने चेहरे थे, कुछ याद नहीं सब भूल गए,
वोह अपने शहर की गलियां थीं, जिन में मैं नाचता गाता था,
***आँख जब अश्क बहाए***
कोई मुंह ज़ोर हवा जब हमारी उल्फत की याद,
दिल से सारे नक्श मिटाए तो मुझे लिख देना....