"Falak Ko Zidd Hai Jahan Bijliyaan Giraane Ki............. Hume Bhi Zidd Hai, Wahin Pe Aashiyaan Banane Ki........" तुम्हें जब मिले कभी फ़ुर्सत मेरे दिल से बोझ उतार दो, मै बहुत दिनों से उदास हूं मुझे भी कोई शाम उधार दो....!
Saturday, February 28, 2009
*****इल्जाम*****
Sunday, October 26, 2008
यादगार "धनतेरस"

यही वह धनतेरस थी स्थान था स्काटलैंड (यूं के) 30-10-2005
जो कहा करते थे की कभी हम बेईमान नही होंगे,
उन्ही के ईमान को देखा आज हमने डगमगाते हुए,
जिन हाथों से उम्मीद थी फूल बरसाने की,
उन्ही हाथों को देखा आज पत्थर बरसाते हुए,
जिस वक़त पर नाज़ हुआ करता था कभी मुझे,
उसी वक़त को देखा रेत सा हाथों से निकल जाते हुए,
जिसने कहा था कि ये साथ नही छूटेगा अपना कभी,
उसी को देखा आज अपना दामन मुझसे छुडाते हुए,
{प्यार} की इन वफाओं का क्या सिला चुका पाओगी तुम,
जिसे देखा बेवफा बन के उस "खुदा" के घर जाते हुए........"प्रियराज"
Sunday, September 14, 2008
उमर भर का गम

Monday, September 8, 2008
*****दरिया के पार*****

मुद्दत से जिसके वास्ते दिल था बेक़रार,
वह लौट कर ना आयी मगर था इन्तज़ार,
***
जो हमसफ़र थी छोड गयी बीच राह में मुझे,
मैं फंस गया भंवर में वो थी दरिया के पार,
***
मन्ज़िल क़रीब आयी तब तुम दूर हो गई,
इतना तो तुम बताओ कि ये था कैसा प्यार,
***
दीवार बनादी किसी ने हम दोनों के दरमियां,
ना वो सुकून से बैठी ना मुझको था क़रार,
***
यह बात ही उमर भर समझ ना पाया मैं,
क्यूं था दिल मेरा उस बेवफ़ा का तलबगार ...
Monday, August 25, 2008
*********यादों के फूल*********

Friday, August 1, 2008
******दर्द की लहरें*******
एहसासों के समंदर में दर्द की लहरों पर,आंसू बहने लगते हैं तेरी याद में,
तो दिल पूछता है मुझ से जिंदगी तू कौन है,
जब दिल को तोड़ कर मुझ को ठुकरा कर,
दिलबर इस दिल को हज़ार ज़ख्म देता है,
तो दिल पूछता है मुझ से जिंदगी तू कौन है,
तरसती आंखों को बेचैन दिल को,
जब वो तड़पा जाता है मुझे,
मोहब्बत का जब कोई अंजाम नही मिलता,
तो दिल पूछता है मुझ से जिंदगी तू कौन है,
हम ने तो जाना था जिंदगी खूबसूरत है,
जिंदगी एक सुहाना सपना है,
जिंदगी मोहब्बत का दूसरा नाम है,
जब हकीकत में कुछ नही मिलता,
तो दिल पूछता है मुझ से जिंदगी तू कौन है,
जिंदगी क्यों आती हो तुम हर बार,
कोई नया नाम लिए हर बार चली आती हो तुम,
जाना है कहाँ तुझे अब तू बता जिंदगी तू कौन है?
****गुजरा हुआ जमाना****

गुज़रा हुआ दिलकश जमाना याद आता है,
जब हुस्न से इश्क टकराया था कभी,
घायल हुआ था एक परवाना याद आता है,
दिल से मोहब्बत के तूफ़ान उठे थे,
जब आंखों का सपने सजाना याद आता है,
कस्तूरी जैसे दिन महकते थे,
मेरे रातों का गुनगुनाना याद आता है,
आंखों का मिल कर झुक जाना नहीं भुला,
होठों का थर-थराना याद आता है,
मेरा उसको कनखियों से देखना,
बार बार और उसका वो मुस्कुराना याद आता है,
रातों को तनहा याद में किसी की ( ...),
धुआं उडाता एक दीवाना याद आता है
