Dilon ko jeetne ka shauk

Hindi Blog Tips

Thursday, April 15, 2010

****खिलौना****


तकदीर के हाथों में खिलौना है आदमी,
दुनिया है तमाशाई तमाशा है आदमी,

गम है किसी को मेरा ना तेरा मलाल है,
हर किसी को अपनी फ़िक्र है अपना ख्याल है,

इस पत्थरों की दुनिया में जीना मुहाल है,
आँखों में ख्वाब जब भी ख़ुशी के सजाए हें,

गम ही हर एक गरीब के हिस्से में आये हें,
ए दिल गिला ना कर यहाँ अपने ही पराये हें...!

Wednesday, November 18, 2009

जल गया आशियाँ......!!



मेरी सादगी ही मेरा जुर्म है कोई और मेरी खता नही,

मैंने तो चाहा था सदा तुमको यह भी मेरी खता नहीं,


जाने कैसी अब हवा चली है रही दोस्ती में वफ़ा नहीं,

यहाँ जल गया मेरा आशियाना अभी बादलों को पता नहीं,


तेरे दर पर दस्तक दे सकूं यह हक़ तुमने दिया नहीं,

मैं राही हूँ राहें उम्मीद का मुझे मंजिलों का पता नहीं,


बेबस हूँ जहाँ में इस कदर जैसे इस जहाँ में मेरा कोई नही,

मेरी सादगी मेरा जुर्म है कोई और मेरी खता नहीं....!


Monday, October 12, 2009

***तुम्हारी फितरत***


समाझ नुझे खिलौना यूँ मेरा दिल तोडा,

पहले बसाया दिल में अब तनहा कयूं छोड़ा,


अगर खेलना था मुझसे पहले ही बताया होता,

पल भर की खुशी दे के क्यूं गम से नाता जोड़ा,


दिलों को कत्ल करना अगर फितरत थी तुम्हारी,

शायद तुम्हारी ज़िन्दगी में बन गया था रोड़ा,


आज बेवफा कहूं तुम्हें या कह दूँ बदगुमानी,

मैं जब जी रहा था तन्हा क्यूं रास्ता मेरा मोडा,


इतना न इतराओ तुम अपने उस "प्यार" पर,

ख़ुद तुम टूटोगी ऐसे जैसे "नसीब" किसी ने फोड़ा,


तुम रोओगी हर पल तब मुझको याद कर के,

सोचोगी तब यह कि क्यूं "राज़" को मैंने छोड़ा..!!

Thursday, August 6, 2009

बेवफा जिंदगी




पास रह कर जुदा सी लगती है, ज़िन्दगी अब बेवफा सी लगती है,
में तुम्हारे बगैर ही जी लूँगा,ये दुआ बद दुआ सी लगती है,

नाम इस का लिखा है आँखों पर, आँसू की खता सी लगती है,
वोह अभी इस तरफ़ से गुजरी है, ये ज़मीन आसमान सी लगती है,

प्यार करना ही जुर्म है शायद, आज दुनिया खफा सी लगती है,
ज़िन्दगी एक खौफ सा तारी है, तेरी यादों का एक अजाब सा जारी है,

भुलाना तुझे इस कदर नही है आसन, एक उमर तेरे नाम पे गुजारी है,
थक कर बैठा है यहाँ कौन भला, ख्वाहिशों का सफर अभी जारी है,

लग कर दीवार से निढाल सा बैठा,
वोह जिस ने रो रो कर रात गुजारी है...


Sunday, July 5, 2009

***मेरी कब्र***


मेरी कब्र पे आके तुम आवाज़ नहीं करना


दर्द की नई दास्ताँ का आगाज़ नहीं करना,
अपनी बेबस्सी को खुद ही बयान करेगी यूं,


चेहरे को किसी आईने का मोहताज नहीं करना,
राज़ जो खुद से ही ना छिपा पाओगी तुम,


ऐसे राज़ मे किसी को हमराज़ नहीं करना,
नामुमकिन है हकीकत के आसमान मे उड़ना,


खाबों के सहारे इसमें परवाज़ नहीं करना,
ज़ख्म फिर ज़ख्म हें इक रोज़ भर जायंगे,


हुश्न वालों को इनके चारासाज़ नहीं करना,
खाख से बनी हो खाख मे मिल जाओगी,


कभी भूले से भी खुद पे नाज़ नहीं करना....!



Friday, June 5, 2009

*******गुमनामी की ज़िन्दगी*******


गुमनामियों मे रहना नहीं है कबूल मुझको,
चलना नहीं गवारा बस साया बनके पीछे,

वोह दिल मे ही छिपा है सब जानते हैं लेकिन,
क्यूं भागते फ़िरते हैं दायरो-हरम के पीछे,

अब “दोस्त” मैं कहूं या उनको कहूं मैं “दुश्मन”,
जो मुस्कुरा रहे हैं खंजर छुपा के अपने पीछे.....!!


Thursday, May 7, 2009

***जनाज़ा****


जब जनाज़ा उठाया जायेगा मेरा उदासी का मंज़र होगा,

कब्र ही मेरी मंज़िल होगी और कब्र ही मेरा घर होगा,



फिर डाल देंगे कब्र में मुझे और मिट्टी में सुला देंगे,

ऐसे होंगे मेरे चाहने वाले मेरे आखरी वक़्त में ये सिला देंगे,


सब रिश्ते दुनियां तक के ही हैं कोई साथ निभाता नहीं,

भूल जाते हैं कुछ ही दिनों में कोई मिलने आता नहीं........