Dilon ko jeetne ka shauk

Hindi Blog Tips

Friday, June 5, 2009

*******गुमनामी की ज़िन्दगी*******


गुमनामियों मे रहना नहीं है कबूल मुझको,
चलना नहीं गवारा बस साया बनके पीछे,

वोह दिल मे ही छिपा है सब जानते हैं लेकिन,
क्यूं भागते फ़िरते हैं दायरो-हरम के पीछे,

अब “दोस्त” मैं कहूं या उनको कहूं मैं “दुश्मन”,
जो मुस्कुरा रहे हैं खंजर छुपा के अपने पीछे.....!!


Thursday, May 7, 2009

***जनाज़ा****


जब जनाज़ा उठाया जायेगा मेरा उदासी का मंज़र होगा,

कब्र ही मेरी मंज़िल होगी और कब्र ही मेरा घर होगा,



फिर डाल देंगे कब्र में मुझे और मिट्टी में सुला देंगे,

ऐसे होंगे मेरे चाहने वाले मेरे आखरी वक़्त में ये सिला देंगे,


सब रिश्ते दुनियां तक के ही हैं कोई साथ निभाता नहीं,

भूल जाते हैं कुछ ही दिनों में कोई मिलने आता नहीं........

Monday, May 4, 2009

*****झील की गहराई*****


ख़ुद अपने लिए बैठ कर सोचेंगे किसी दिन,

यूँ है के तुझे भूल के देखेंगे किसी दिन,


बैठ के ही फिरते हैं कई लफ्ज़ जो दिल मैं,

दुनिया ने दिया वक्त तो लिखेंगे किसी दिन,


जाती है किसी झील की गहराई कहाँ तक,

आँखों में तेरी डूब कर देखेंगे किसी दिन,


खुसबू से भरी शाम मैं जुगनू के कलम से,

इक नज़्म तेरे वास्ते लिखेंगे किसी दिन,


सोयेगे तेरी आँख की खुलावत मैं किसी रात,

साए में तेरी जुल्फ के प्रियराज जागेंगे किसी दिन .......


Thursday, April 23, 2009

हसीन ख्वाब...........!!!


कह गया एक हसीन यह रात मेरे ख्वाबो में आकर,
करता हूँ मोहब्बत तुझसे और सिर्फ मरता हूँ तुझपे,

आइना-ए-दिल में तस्वीर रहती है तेरी ही ए-हमनशीं,
जो सोचता हूँ ख़त लिखने की ग़ज़ल लिख जाता हूँ तुझपे,

आँखें खुलते ही कहीं भूल ना जाना मुझको ए-पर्दानशीं,
मैं वो सावन की बारिश हूँ जो बरसूँगा सिर्फ तुझपे,

जो आ गया सामने कभी तो कैसे पहचानेगी तू मुझ को,
इसलिए बदन की खुसबू अपनी छोडे जा रहा हूँ तुझपे,

अपने सीने से लगाए रखना आँखों में बसाये रखना,
ना तोड़ना कभी दिल मेरा इतना एहसान करना मुझपे,

आज ख़्वाबों में आया हूँ कल जिंदगी में भी आऊंगा,
मैं हूँ सिर्फ तेरा दिल-ओ-जान जो लुटा बैठा हूँ तुझपे,

आज जा रहा हूँ सिर्फ इज़हार करके इकरार के इंतज़ार में,
कल रात फिर आ कर मोहब्बत अपनी बिखराऊंगा मैं तुझपे...

Saturday, April 4, 2009

***यह हाल तुम्हारे बाद हुआ***

स्वर्गीय श्रीमती शकुन्तला जी
(14 नवम्बर, 2005)
किस से कहें और कौन सुने, जो हाल तुम्हारे बाद हुआ,
इस झील सी नीली आँखों में, एक खवाब बहुत बर्बाद हुआ,
*
ये हिजर हवा भी दुश्मन है, उस नाम के सारे रंगों की,
वोह नाम जो मेरे होंटों पे, खुशबू की तरह आबाद हुआ,
**
इस शहर में कितने चेहरे थे, कुछ याद नहीं सब भूल गए,
एक शक्स किताबों जैसा था, वोह शख्स ज़ुबानी याद हुआ',
***
वोह अपने शहर की गलियां थीं, जिन में मैं नाचता गाता था,
अब इससे भी फरक नहीं पड़ता, न-शाद हुआ के सहाद हुआ,
****
बे नाम सतायाश रहता था, इन गहरी सांवली आँखों में,
ऐसा तो कभी सोचा ही न था, दिल जितना अब बे-दर्द हुआ......!!

***आँख जब अश्क बहाए***


आँख जब अश्क बहाए तो मुझे लिख देना,
जब मेरी याद सताए तो मुझे लिख देना,
*
कोई सावन की घटा जब तेरी छत पे आके,
आग सी दिल में लगाये तो मुझे लिख देना,
**
शब् के सन्नाटे में जब टूटा हुआ दिल कोई,
दर्द का गीत सुनाये तो मुझे लिख देना,
***
हाथ फिर देखना अपने शब्-ऐ-तन्हाई में,
उसकी हर रेखा बुलाये तो मुझे लिख देना,
****
ऐ मेरी जान-ऐ-जहाँ तेरी वफ़ा के मोती,
भीगी पलकें जो लुटाएं तो मुझे लिख देना,
*****

कोई मुंह ज़ोर हवा जब हमारी उल्फत की याद,

दिल से सारे नक्श मिटाए तो मुझे लिख देना....

Saturday, March 28, 2009

दिल टूट कर........


उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है
***
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर,
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है,
***
उसके साथ आज सारी महफिल है ,
अब ज़माना भी उसके साथ है,
***
आज मैं तन्हा हूँ, अब मैं अकेला हूँ,
बस रुसवाईया ही मेरे साथ है...... .