चले थे दिलों को जीतने पर.........!!सुर्ख आंखों में काजल लगा है रुख पे घज़ा सजाये हुवे है,
अहले हद अपनी मट्टी से कहदे दाग लगने नपाये कफ़न को
बिखरी जुल्फें परेशान चेहरा अश्क आँखों में आए हुवे है,
दफ़न के वक्त सब दोस्तों ने यह चुकाया मोहब्बत का बदला,
उनकी तारीफ़ क्या पूछते हो उम्र सारी गुनाहों में गुजरी ऐसे,
जिंदगी में न रास आई राहत चैन से अब सोने दो कफ़न में,
खोयी खोयी सी बेचैन आँखे बेक़रारी है चेहरे पे छाई,






