Dilon ko jeetne ka shauk

Hindi Blog Tips

Tuesday, July 8, 2008

+++++चोट खाए हुए हैं+++++

चले थे दिलों को जीतने पर.........!!
इश्क में हम तुम्हे क्या बताये किस कदर चोट खाए हुवे है,

मौत ने हम को मारा है और हम जिंदगी के सताए हुवे हैं ,

पहन कर शादी का जोड़ा उसने सिर्फ़ चूमा था मेरे कफ़न को,
बस उसी दिन से जन्नत की हूरें मुझको दूल्हा बनाये हुवे है,

सुर्ख आंखों में काजल लगा है रुख पे घज़ा सजाये हुवे है,
ऐसे आए है मय्यत पे मेरी जैसे शादी में आए हुवे है,

अहले हद अपनी मट्टी से कहदे दाग लगने नपाये कफ़न को
आज ही हमने बदले है कपड़े आज ही हम नहाए हुवे हैं,

बिखरी जुल्फें परेशान चेहरा अश्क आँखों में आए हुवे है,
ए काजल ठहर जा चंद लम्हे वोह इबादत को आए हुवे है,

दफ़न के वक्त सब दोस्तों ने यह चुकाया मोहब्बत का बदला,
फैक दी ख़ाक मेरे बदन पर यह न सोंचा नहाय हुवे है,

उनकी तारीफ़ क्या पूछते हो उम्र सारी गुनाहों में गुजरी ऐसे,
मासूमियत से है बैठे ऐसे जैसे की गंगा में नहाए हुवे है,

जिंदगी में न रास आई राहत चैन से अब सोने दो कफ़न में,
ए फरिश्तो तुम तो न मारो हम तो इस जहाँ के सताए हुवे है,

खोयी खोयी सी बेचैन आँखे बेक़रारी है चेहरे पे छाई,
छोड़ दो देना झूठी तसल्ली इश्क की चोट खाए हुवे है ........

Tuesday, June 17, 2008

**********सफर**********


मैं एक मुसाफ़िर मन्ज़िल की तलाश में भटक रहा हूं,
*
एक तन्हा सा सफ़र है जिस पर मैं चल रह हूं,
मुझे हमसफ़र का पता नही ना मन्ज़िल का ठिकाना
**
एक अजीब सी कश-म-कश में मैं चला जा रहा हूं,
ज़िन्दगी भी अब तो साथ छोडती नज़र आ रही है,
***
फिर भी मैं चलता जा रहा हूं यह कैसा सफ़र है,
जिसका ना कोई ठिकाना बस तन्हा चला जा रहा हूं,
****
कह्ते क्यूं हैं लोग इस वीरान सफ़र को मोहब्बत,
यह मुझ को पता नही फिर भी मैं चला जा रहा हूँ

Saturday, June 14, 2008

*******रहम कर*******


तेरी आंखों की गहराई में आज डूब जाने दे,


जो ना कह सका लफ़्ज़ों में आंखों से बताने दे,
जरूरी नहीं कि सभी ख्वाहिशें पूरी हों मेरी,

***

पर हसरत है क्या मेरी अब मुझको जताने दे,
कब शुरु हुआ था आंखे चुराने का सिलसिला

***

पहली दफ़ा नज़रों से तेरे मुझे निगाह मिलाने दे,
तेरी पायल की आवाज गूंजती कानों में रात भर,

***

कि आज चुपके से मुझे उनके घुंघरू हटाने दे !
इन रेशमी बालों ने सताया है ख्वाबों में मुझे,

***

आज हक़ीकत में मुझे ज़रा उनको संवारने दे,
गम सहने की आदत खुद को डाली है हमने,

***

दे तेरे गमों को सारे उन्हे मुझमें समाने दे,
खुशियों को मैने संजोया है आज तक तेरे लिये,

***

सभी खुशियों को मेरी मुझे तुझ पर लुटाने दे,
माफ़ करना मेरे मौला मुझे हट गया हूं मक्सद से,

***

ताकत दे मुझे आज मेरे जज्बात उनको सुनाने दे,
इस पार से उधर का मंज़र दिखता है हसीन बडा,

रहम कर मुझ पर कि मुझे उस जानिब तो आने दे !

Wednesday, June 11, 2008

********* प्यार की कीमत *********

मैंने उसको सलाम लिख भेजा,
हाल-ए-दिल तमाम लिख भेजा ।
*
मैंने पूछा तेरे होठ कैसे हैं,
उसने एक लफ़्ज "जाम" लिख भेजा।
*
मैंने पूछा तेरे बाल कैसे हैं,
उसने कुदरत का इनाम लिख भेजा।
*
मैंने पूछा कब होगी मुलाकात,
उसने कयामत की शाम लिख भेजा।
*
मैने पूछा इतनी तडफ़ती क्यों हो,
उसने जवानी का इन्तकाम लिख भेजा।
*
मैंने पूछा तेरे खुद-ओ-ख्याल कैसे हैं,
उसने तो हुशन तमाम लिख भेजा।
*
मैंने पूछा तुझे नफ़रत किस से ,
ऐ - खुदा उसने मेरा ही नाम लिख भेजा
***
जलने के अलावा चारा नहीं
*
गरमी-ए-हसरत के नाकाम से जलते हैं,
हम चिरागों की तरह हर शाम से जलते हैं
*
जब आता है नाम तेरा मेरे नाम के साथ,
न जाने कितने लोग हमारे नाम से जलते हैं

***********ज़ख्म***********

बस इतनी सी इनायत मुझ पे एक बार कीजिए,
कभी आ के मेरे ज़ख्मों का दीदार कीजिये।
***
हो जायें बेगाने आप शौक से सनम,
आपके हैं आपके रहेंगे एतबार कीजिये।
***
पढने वाले ही डर जायें देख कर इसे,
किताब-ए-दिल को इतना ना दागदार कीजिये।
***
ना मजबूर कीजिये कि मैं उनको भूल जाऊं,
मुझे मेरी वफ़ाओं का ना गुनाहगार कीजिये।
***
इन जलते दीयों को देख कर न मुस्कुराइये,
जरा हवाओं के चलने का इन्तज़ार कीजिये।
***
गुलाबों से मुहब्बत है जिन्हें उनको खबर कर दो,
चुभा करते वो कांटे भी बहुत अरमान रखते हैं
***
बहारों के ही बस आशिक नहीं ये जान लो,
ख़िज़ाँ के वास्ते भी दिल में हम सम्मान रखते हैं

*******उनके आने की उम्मीद*******

उनके आने की जब कोई उमीद नहीं बाकी,
फ़िर क्यों देहलीज पर शमा जलाए बैठी हैं।
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इक तुम ही नहीं जिसने हमें भुला दिया,
इक वो हम भी हैं जो खुद को भुलाए बैठे हैं।
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तुम्हें भूलने की कोशिश तो बहुत करते हैं हम,
पर याद उस ही की दिलाते हैं यह ही लोग।
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वही लोग तो कहते हैं मुस्कुराते रहो हरदम,
फ़िर जिकर उसका ही छेडकर रुलाते हैं ये लोग।
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पहले तो कहा मुझसे कि ये रास्ता बहुत ठीक है,
हम चले तो हर कदम पे उंगलियाँ उठाते हैं ये लोग।
***
बहुत इंतजार किया उनका
***
सबने जवाब दिये अपना कलाम किसी ने ना लिखा,
चन्द इशारों में अपना सलाम किसी ने ना लिखा।
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खुद को कोसें कि या गैरों को इल्ज़ाम दें हम,
मुझ को अपना पयाम किसी ने ना लिखा।

Sunday, June 8, 2008

***********ख्वाब************


बरसों के बाद देखा एक शख्स दिलरुबा सा,
अब ज़हन में नही है पर नाम था भला सा,
***
अल्फाज़ थे के जुगनू आवाज़ के सफर में,
बन जाए जंगलों में जिस तरह रास्ता सा
***
खवाब में ख्वाब यादों में याद उसकी ,
नींदों में घुल गया हो जैसे के रतजगा सा ,
***
पहले भी लोग आए कितने ही ज़िंदगी में ,
वो हर तरह से लेकिन औरों से था जुदा सा ,

तेवर थे बेरुखी के अंदाज़ दोस्ती का ,
वो अजनबी था लेकिन लगता था आशना सा ,
***
कुछ ये के मुद्दतों से हम भी नही थे रोये ,
कुछ ज़हर में बुझा था अहबाब का दिलासा,
***
फिर यूं हुआ की सावन आखों में आ बसे थे,
फिर यूं हुआ के जैसे दिल भी था आबला सा,
***
अब सच कहें यारों हम को ख़बर नही थी,
बन जाएगा क़यामत एक वाकया ज़रा सा......