Dilon ko jeetne ka shauk

Hindi Blog Tips

Wednesday, July 28, 2010

~~तन्हाइयों का सफ़र~~


चाँद अपना सफ़र ख़तम करता रहा,
रात भर आसमान यूं पिघलता रहा,

दिलों में याद का नश्तर चुभते रहे,
दर्द बन कर शमां दिल में जलता रहा,

वो जो दिल से हमें भुलाये बैठे थे,
दिल उनसे मिलने को मचलता रहा,

आंसू पलकों से ना छलका कभी,
दर्द वो चुपके से दिल में पलता रहा,

रोज़ आ कर शबनम रोती रही रात भर,
मेरी तन्हाइयों का सफ़र यूं ही चलता रहा..!

Monday, May 3, 2010

दिल के अफसाने....


क्या कहें हम कैसे तुमसे दूर हो गए,
हालात से कुछ खुद से मजबूर हो गए,

मुहब्बत रुला देती है कब यह माना था,
अपने दिल के अफसाने यही दस्तूर दे गए,

मंजिल जिसे समझा बना वही मील का पत्थर,
नई मंजिल नए रास्ते सब मंज़र हो गए,

हद से बढ़ जाये जो गम वो देता नहीं दर्द,
मुस्कुरा रहे हें ऐसे हम रंजूर हो गए,

दिल तेरा रेज़ा रेज़ा है कैसे संभाले तुझको,
खुदाया कैसे यह हमसे कसूर हो गए........!!!


Thursday, April 15, 2010

****खिलौना****


तकदीर के हाथों में खिलौना है आदमी,
दुनिया है तमाशाई तमाशा है आदमी,

गम है किसी को मेरा ना तेरा मलाल है,
हर किसी को अपनी फ़िक्र है अपना ख्याल है,

इस पत्थरों की दुनिया में जीना मुहाल है,
आँखों में ख्वाब जब भी ख़ुशी के सजाए हें,

गम ही हर एक गरीब के हिस्से में आये हें,
ए दिल गिला ना कर यहाँ अपने ही पराये हें...!

Wednesday, November 18, 2009

जल गया आशियाँ......!!



मेरी सादगी ही मेरा जुर्म है कोई और मेरी खता नही,

मैंने तो चाहा था सदा तुमको यह भी मेरी खता नहीं,


जाने कैसी अब हवा चली है रही दोस्ती में वफ़ा नहीं,

यहाँ जल गया मेरा आशियाना अभी बादलों को पता नहीं,


तेरे दर पर दस्तक दे सकूं यह हक़ तुमने दिया नहीं,

मैं राही हूँ राहें उम्मीद का मुझे मंजिलों का पता नहीं,


बेबस हूँ जहाँ में इस कदर जैसे इस जहाँ में मेरा कोई नही,

मेरी सादगी मेरा जुर्म है कोई और मेरी खता नहीं....!


Monday, October 12, 2009

***तुम्हारी फितरत***


समाझ नुझे खिलौना यूँ मेरा दिल तोडा,

पहले बसाया दिल में अब तनहा कयूं छोड़ा,


अगर खेलना था मुझसे पहले ही बताया होता,

पल भर की खुशी दे के क्यूं गम से नाता जोड़ा,


दिलों को कत्ल करना अगर फितरत थी तुम्हारी,

शायद तुम्हारी ज़िन्दगी में बन गया था रोड़ा,


आज बेवफा कहूं तुम्हें या कह दूँ बदगुमानी,

मैं जब जी रहा था तन्हा क्यूं रास्ता मेरा मोडा,


इतना न इतराओ तुम अपने उस "प्यार" पर,

ख़ुद तुम टूटोगी ऐसे जैसे "नसीब" किसी ने फोड़ा,


तुम रोओगी हर पल तब मुझको याद कर के,

सोचोगी तब यह कि क्यूं "राज़" को मैंने छोड़ा..!!