
आइना-ए-दिल में तस्वीर रहती है तेरी ही ए-हमनशीं,
आँखें खुलते ही कहीं भूल ना जाना मुझको ए-पर्दानशीं,
जो आ गया सामने कभी तो कैसे पहचानेगी तू मुझ को,
अपने सीने से लगाए रखना आँखों में बसाये रखना,
आज ख़्वाबों में आया हूँ कल जिंदगी में भी आऊंगा,
आज जा रहा हूँ सिर्फ इज़हार करके इकरार के इंतज़ार में,





