Dilon ko jeetne ka shauk

Hindi Blog Tips

Thursday, April 23, 2009

हसीन ख्वाब...........!!!


कह गया एक हसीन यह रात मेरे ख्वाबो में आकर,
करता हूँ मोहब्बत तुझसे और सिर्फ मरता हूँ तुझपे,

आइना-ए-दिल में तस्वीर रहती है तेरी ही ए-हमनशीं,
जो सोचता हूँ ख़त लिखने की ग़ज़ल लिख जाता हूँ तुझपे,

आँखें खुलते ही कहीं भूल ना जाना मुझको ए-पर्दानशीं,
मैं वो सावन की बारिश हूँ जो बरसूँगा सिर्फ तुझपे,

जो आ गया सामने कभी तो कैसे पहचानेगी तू मुझ को,
इसलिए बदन की खुसबू अपनी छोडे जा रहा हूँ तुझपे,

अपने सीने से लगाए रखना आँखों में बसाये रखना,
ना तोड़ना कभी दिल मेरा इतना एहसान करना मुझपे,

आज ख़्वाबों में आया हूँ कल जिंदगी में भी आऊंगा,
मैं हूँ सिर्फ तेरा दिल-ओ-जान जो लुटा बैठा हूँ तुझपे,

आज जा रहा हूँ सिर्फ इज़हार करके इकरार के इंतज़ार में,
कल रात फिर आ कर मोहब्बत अपनी बिखराऊंगा मैं तुझपे...

Saturday, April 4, 2009

***यह हाल तुम्हारे बाद हुआ***

स्वर्गीय श्रीमती शकुन्तला जी
(14 नवम्बर, 2005)
किस से कहें और कौन सुने, जो हाल तुम्हारे बाद हुआ,
इस झील सी नीली आँखों में, एक खवाब बहुत बर्बाद हुआ,
*
ये हिजर हवा भी दुश्मन है, उस नाम के सारे रंगों की,
वोह नाम जो मेरे होंटों पे, खुशबू की तरह आबाद हुआ,
**
इस शहर में कितने चेहरे थे, कुछ याद नहीं सब भूल गए,
एक शक्स किताबों जैसा था, वोह शख्स ज़ुबानी याद हुआ',
***
वोह अपने शहर की गलियां थीं, जिन में मैं नाचता गाता था,
अब इससे भी फरक नहीं पड़ता, न-शाद हुआ के सहाद हुआ,
****
बे नाम सतायाश रहता था, इन गहरी सांवली आँखों में,
ऐसा तो कभी सोचा ही न था, दिल जितना अब बे-दर्द हुआ......!!

***आँख जब अश्क बहाए***


आँख जब अश्क बहाए तो मुझे लिख देना,
जब मेरी याद सताए तो मुझे लिख देना,
*
कोई सावन की घटा जब तेरी छत पे आके,
आग सी दिल में लगाये तो मुझे लिख देना,
**
शब् के सन्नाटे में जब टूटा हुआ दिल कोई,
दर्द का गीत सुनाये तो मुझे लिख देना,
***
हाथ फिर देखना अपने शब्-ऐ-तन्हाई में,
उसकी हर रेखा बुलाये तो मुझे लिख देना,
****
ऐ मेरी जान-ऐ-जहाँ तेरी वफ़ा के मोती,
भीगी पलकें जो लुटाएं तो मुझे लिख देना,
*****

कोई मुंह ज़ोर हवा जब हमारी उल्फत की याद,

दिल से सारे नक्श मिटाए तो मुझे लिख देना....

Saturday, March 28, 2009

दिल टूट कर........


उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है
***
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर,
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है,
***
उसके साथ आज सारी महफिल है ,
अब ज़माना भी उसके साथ है,
***
आज मैं तन्हा हूँ, अब मैं अकेला हूँ,
बस रुसवाईया ही मेरे साथ है...... .

Sunday, March 1, 2009

*****अमिट यादों के पल*****

***एक अमिट यादों के पल***
सजा को मेने रजा पे छोड़ दिया,
हर एक काम मेंने खुदा पे छोड़ दिया,
*
वोह मुझे याद रखे या भुला दे,
उसी का काम था उसी की रजा पे छोड़ दिया,
**
उसी की मर्ज़ी बुझा दे या जला दे,
चिराग मैंने जला के हवा पे छोड़ दिया,
***
उस से बात भी करते तो किस तरह करते,
ये मसला दुआ का था दुआ पे छोड़ दिया,
****
इसीलिए तो कहते हें बेवफा हमको,
हमने सारा ज़माना वफ़ा पे छोड़ दिया.....

Saturday, February 28, 2009

*****इल्जाम*****

****इल्जाम****
वो सारे इल्जाम हम पर लगा के चली गयी,
मरने से पहले मौत का एहसास दे के चली गयी,
हम भी उनके लिए ही मुस्कुराते रहे,
वो भी गम अपनी आँखों में छुपा के चली गयी,
अपना समझ के उनके सारे गम भी उठाते रहे,
वो खुशियों में मुस्कुराने का भी एहसान जता के चली गयी,
मेरे मरने तक इंतज़ार उनके लिए मुश्किल था शायद,
तभी तो वो हमको जिंदा ही दफना के चली गयी......!

Sunday, October 26, 2008

यादगार "धनतेरस"



यही वह धनतेरस थी स्थान था स्काटलैंड (यूं के) 30-10-2005


जो कहा करते थे की कभी हम बेईमान नही होंगे,

उन्ही के ईमान को देखा आज हमने डगमगाते हुए,


जिन हाथों से उम्मीद थी फूल बरसाने की,

उन्ही हाथों को देखा आज पत्थर बरसाते हुए,


जिस वक़त पर नाज़ हुआ करता था कभी मुझे,

उसी वक़त को देखा रेत सा हाथों से निकल जाते हुए,


जिसने कहा था कि ये साथ नही छूटेगा अपना कभी,

उसी को देखा आज अपना दामन मुझसे छुडाते हुए,


{प्यार} की इन वफाओं का क्या सिला चुका पाओगी तुम,

जिसे देखा बेवफा बन के उस "खुदा" के घर जाते हुए........"प्रियराज"