कोई मुंह ज़ोर हवा जब हमारी उल्फत की याद,
दिल से सारे नक्श मिटाए तो मुझे लिख देना....
"Falak Ko Zidd Hai Jahan Bijliyaan Giraane Ki............. Hume Bhi Zidd Hai, Wahin Pe Aashiyaan Banane Ki........" तुम्हें जब मिले कभी फ़ुर्सत मेरे दिल से बोझ उतार दो, मै बहुत दिनों से उदास हूं मुझे भी कोई शाम उधार दो....!
कोई मुंह ज़ोर हवा जब हमारी उल्फत की याद,
दिल से सारे नक्श मिटाए तो मुझे लिख देना....

जो कहा करते थे की कभी हम बेईमान नही होंगे,
उन्ही के ईमान को देखा आज हमने डगमगाते हुए,
जिन हाथों से उम्मीद थी फूल बरसाने की,
उन्ही हाथों को देखा आज पत्थर बरसाते हुए,
जिस वक़त पर नाज़ हुआ करता था कभी मुझे,
उसी वक़त को देखा रेत सा हाथों से निकल जाते हुए,
जिसने कहा था कि ये साथ नही छूटेगा अपना कभी,
उसी को देखा आज अपना दामन मुझसे छुडाते हुए,
{प्यार} की इन वफाओं का क्या सिला चुका पाओगी तुम,
जिसे देखा बेवफा बन के उस "खुदा" के घर जाते हुए........"प्रियराज"


मुद्दत से जिसके वास्ते दिल था बेक़रार,
वह लौट कर ना आयी मगर था इन्तज़ार,
***
जो हमसफ़र थी छोड गयी बीच राह में मुझे,
मैं फंस गया भंवर में वो थी दरिया के पार,
***
मन्ज़िल क़रीब आयी तब तुम दूर हो गई,
इतना तो तुम बताओ कि ये था कैसा प्यार,
***
दीवार बनादी किसी ने हम दोनों के दरमियां,
ना वो सुकून से बैठी ना मुझको था क़रार,
***
यह बात ही उमर भर समझ ना पाया मैं,
क्यूं था दिल मेरा उस बेवफ़ा का तलबगार ...