Dilon ko jeetne ka shauk

Hindi Blog Tips

Saturday, April 4, 2009

***आँख जब अश्क बहाए***


आँख जब अश्क बहाए तो मुझे लिख देना,
जब मेरी याद सताए तो मुझे लिख देना,
*
कोई सावन की घटा जब तेरी छत पे आके,
आग सी दिल में लगाये तो मुझे लिख देना,
**
शब् के सन्नाटे में जब टूटा हुआ दिल कोई,
दर्द का गीत सुनाये तो मुझे लिख देना,
***
हाथ फिर देखना अपने शब्-ऐ-तन्हाई में,
उसकी हर रेखा बुलाये तो मुझे लिख देना,
****
ऐ मेरी जान-ऐ-जहाँ तेरी वफ़ा के मोती,
भीगी पलकें जो लुटाएं तो मुझे लिख देना,
*****

कोई मुंह ज़ोर हवा जब हमारी उल्फत की याद,

दिल से सारे नक्श मिटाए तो मुझे लिख देना....

Saturday, March 28, 2009

दिल टूट कर........


उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है
***
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर,
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है,
***
उसके साथ आज सारी महफिल है ,
अब ज़माना भी उसके साथ है,
***
आज मैं तन्हा हूँ, अब मैं अकेला हूँ,
बस रुसवाईया ही मेरे साथ है...... .

Sunday, March 1, 2009

*****अमिट यादों के पल*****

***एक अमिट यादों के पल***
सजा को मेने रजा पे छोड़ दिया,
हर एक काम मेंने खुदा पे छोड़ दिया,
*
वोह मुझे याद रखे या भुला दे,
उसी का काम था उसी की रजा पे छोड़ दिया,
**
उसी की मर्ज़ी बुझा दे या जला दे,
चिराग मैंने जला के हवा पे छोड़ दिया,
***
उस से बात भी करते तो किस तरह करते,
ये मसला दुआ का था दुआ पे छोड़ दिया,
****
इसीलिए तो कहते हें बेवफा हमको,
हमने सारा ज़माना वफ़ा पे छोड़ दिया.....

Saturday, February 28, 2009

*****इल्जाम*****

****इल्जाम****
वो सारे इल्जाम हम पर लगा के चली गयी,
मरने से पहले मौत का एहसास दे के चली गयी,
हम भी उनके लिए ही मुस्कुराते रहे,
वो भी गम अपनी आँखों में छुपा के चली गयी,
अपना समझ के उनके सारे गम भी उठाते रहे,
वो खुशियों में मुस्कुराने का भी एहसान जता के चली गयी,
मेरे मरने तक इंतज़ार उनके लिए मुश्किल था शायद,
तभी तो वो हमको जिंदा ही दफना के चली गयी......!

Sunday, October 26, 2008

यादगार "धनतेरस"



यही वह धनतेरस थी स्थान था स्काटलैंड (यूं के) 30-10-2005


जो कहा करते थे की कभी हम बेईमान नही होंगे,

उन्ही के ईमान को देखा आज हमने डगमगाते हुए,


जिन हाथों से उम्मीद थी फूल बरसाने की,

उन्ही हाथों को देखा आज पत्थर बरसाते हुए,


जिस वक़त पर नाज़ हुआ करता था कभी मुझे,

उसी वक़त को देखा रेत सा हाथों से निकल जाते हुए,


जिसने कहा था कि ये साथ नही छूटेगा अपना कभी,

उसी को देखा आज अपना दामन मुझसे छुडाते हुए,


{प्यार} की इन वफाओं का क्या सिला चुका पाओगी तुम,

जिसे देखा बेवफा बन के उस "खुदा" के घर जाते हुए........"प्रियराज"

Sunday, September 14, 2008

उमर भर का गम


आंखें भी वोही हैं दरीचा भी वोही है
और मन के आँगन में उतरता भी वोही है

जिसने मेरे जज्बों की सदाक़त को ना जाना,
अब मेरी रफाकात को तरसता भी वोही है ,

इस दिल के खराबे से गुज़र किस का हुआ है,
आँखें भी वोही है होंट भी लहजा भी वोही है

जो कुछ भी कहा था मेरी तनहाइयों ने मुझ से,
इस शहर की दीवार पे लिखा भी वोही है,

वोह जिस ने दिए मुझ को मुहब्बत के खजाने,
बादल की तरह आँख से बरसा भी वोही है,

साथ निभाने की कसमें खाई थी जिसने,
उम्र भर का गम दे के गया भी वोही है......!

Monday, September 8, 2008

*****दरिया के पार*****


मुद्दत से जिसके वास्ते दिल था बेक़रार,

वह लौट कर ना आयी मगर था इन्तज़ार,

***

जो हमसफ़र थी छोड गयी बीच राह में मुझे,

मैं फंस गया भंवर में वो थी दरिया के पार,

***

मन्ज़िल क़रीब आयी तब तुम दूर हो गई,

इतना तो तुम बताओ कि ये था कैसा प्यार,

***

दीवार बनादी किसी ने हम दोनों के दरमियां,

ना वो सुकून से बैठी ना मुझको था क़रार,

***

यह बात ही उमर भर समझ ना पाया मैं,

क्यूं था दिल मेरा उस बेवफ़ा का तलबगार ...