Dilon ko jeetne ka shauk

Hindi Blog Tips

Sunday, October 26, 2008

यादगार "धनतेरस"



यही वह धनतेरस थी स्थान था स्काटलैंड (यूं के) 30-10-2005


जो कहा करते थे की कभी हम बेईमान नही होंगे,

उन्ही के ईमान को देखा आज हमने डगमगाते हुए,


जिन हाथों से उम्मीद थी फूल बरसाने की,

उन्ही हाथों को देखा आज पत्थर बरसाते हुए,


जिस वक़त पर नाज़ हुआ करता था कभी मुझे,

उसी वक़त को देखा रेत सा हाथों से निकल जाते हुए,


जिसने कहा था कि ये साथ नही छूटेगा अपना कभी,

उसी को देखा आज अपना दामन मुझसे छुडाते हुए,


{प्यार} की इन वफाओं का क्या सिला चुका पाओगी तुम,

जिसे देखा बेवफा बन के उस "खुदा" के घर जाते हुए........"प्रियराज"

Sunday, September 14, 2008

उमर भर का गम


आंखें भी वोही हैं दरीचा भी वोही है
और मन के आँगन में उतरता भी वोही है

जिसने मेरे जज्बों की सदाक़त को ना जाना,
अब मेरी रफाकात को तरसता भी वोही है ,

इस दिल के खराबे से गुज़र किस का हुआ है,
आँखें भी वोही है होंट भी लहजा भी वोही है

जो कुछ भी कहा था मेरी तनहाइयों ने मुझ से,
इस शहर की दीवार पे लिखा भी वोही है,

वोह जिस ने दिए मुझ को मुहब्बत के खजाने,
बादल की तरह आँख से बरसा भी वोही है,

साथ निभाने की कसमें खाई थी जिसने,
उम्र भर का गम दे के गया भी वोही है......!

Monday, September 8, 2008

*****दरिया के पार*****


मुद्दत से जिसके वास्ते दिल था बेक़रार,

वह लौट कर ना आयी मगर था इन्तज़ार,

***

जो हमसफ़र थी छोड गयी बीच राह में मुझे,

मैं फंस गया भंवर में वो थी दरिया के पार,

***

मन्ज़िल क़रीब आयी तब तुम दूर हो गई,

इतना तो तुम बताओ कि ये था कैसा प्यार,

***

दीवार बनादी किसी ने हम दोनों के दरमियां,

ना वो सुकून से बैठी ना मुझको था क़रार,

***

यह बात ही उमर भर समझ ना पाया मैं,

क्यूं था दिल मेरा उस बेवफ़ा का तलबगार ...

Monday, August 25, 2008

*********यादों के फूल*********



आओ यादों के फूल सजा ले हम,
कभी तुम याद आओ हमें कभी याद तुम्हे आए हम,

दिल की चौखट पर घावों ने किए हैं बसेरे,
कभी सहलाओं तुम कभी मरहम लगाए हम,

यूँ न मिलना हम से जैसे मिलते हों किसी अजनबी से,
कभी लगाना गले हमको कभी पहनाना हार बाहों के,

मेरे दिल पर आज भी हैं यादें उन मुलाकातों की,
कभी आना तेरा दहलीज पर मेरी कभी परदों से,

सनम न कटे अब इन्जेज़ार की यह घडियां,
यादों के फूलों से कैसे ज़िन्दगी गुजारे हम....

Friday, August 1, 2008

******दर्द की लहरें*******

एहसासों के समंदर में दर्द की लहरों पर,
आंसू बहने लगते हैं तेरी याद में,
तो दिल पूछता है मुझ से जिंदगी तू कौन है,
जब दिल को तोड़ कर मुझ को ठुकरा कर,
दिलबर इस दिल को हज़ार ज़ख्म देता है,
तो दिल पूछता है मुझ से जिंदगी तू कौन है,
तरसती आंखों को बेचैन दिल को,
जब वो तड़पा जाता है मुझे,
मोहब्बत का जब कोई अंजाम नही मिलता,
तो दिल पूछता है मुझ से जिंदगी तू कौन है,
हम ने तो जाना था जिंदगी खूबसूरत है,

जिंदगी एक सुहाना सपना है,
जिंदगी मोहब्बत का दूसरा नाम है,
जब हकीकत में कुछ नही मिलता,

तो दिल पूछता है मुझ से जिंदगी तू कौन है,
जिंदगी क्यों आती हो तुम हर बार,

कोई नया नाम लिए हर बार चली आती हो तुम,
जाना है कहाँ तुझे अब तू बता जिंदगी तू कौन है?

****गुजरा हुआ जमाना****


जो कह न सके वो फसाना याद आता है,
गुज़रा हुआ दिलकश जमाना याद आता है,


जब हुस्न से इश्क टकराया था कभी,
घायल हुआ था एक परवाना याद आता है,


दिल से मोहब्बत के तूफ़ान उठे थे,
जब आंखों का सपने सजाना याद आता है,


कस्तूरी जैसे दिन महकते थे,
मेरे रातों का गुनगुनाना याद आता है,


आंखों का मिल कर झुक जाना नहीं भुला,
होठों का थर-थराना याद आता है,


मेरा उसको कनखियों से देखना,
बार बार और उसका वो मुस्कुराना याद आता है,


रातों को तनहा याद में किसी की ( ...),
धुआं उडाता एक दीवाना याद आता है

Tuesday, July 8, 2008

+++++चोट खाए हुए हैं+++++

चले थे दिलों को जीतने पर.........!!
इश्क में हम तुम्हे क्या बताये किस कदर चोट खाए हुवे है,

मौत ने हम को मारा है और हम जिंदगी के सताए हुवे हैं ,

पहन कर शादी का जोड़ा उसने सिर्फ़ चूमा था मेरे कफ़न को,
बस उसी दिन से जन्नत की हूरें मुझको दूल्हा बनाये हुवे है,

सुर्ख आंखों में काजल लगा है रुख पे घज़ा सजाये हुवे है,
ऐसे आए है मय्यत पे मेरी जैसे शादी में आए हुवे है,

अहले हद अपनी मट्टी से कहदे दाग लगने नपाये कफ़न को
आज ही हमने बदले है कपड़े आज ही हम नहाए हुवे हैं,

बिखरी जुल्फें परेशान चेहरा अश्क आँखों में आए हुवे है,
ए काजल ठहर जा चंद लम्हे वोह इबादत को आए हुवे है,

दफ़न के वक्त सब दोस्तों ने यह चुकाया मोहब्बत का बदला,
फैक दी ख़ाक मेरे बदन पर यह न सोंचा नहाय हुवे है,

उनकी तारीफ़ क्या पूछते हो उम्र सारी गुनाहों में गुजरी ऐसे,
मासूमियत से है बैठे ऐसे जैसे की गंगा में नहाए हुवे है,

जिंदगी में न रास आई राहत चैन से अब सोने दो कफ़न में,
ए फरिश्तो तुम तो न मारो हम तो इस जहाँ के सताए हुवे है,

खोयी खोयी सी बेचैन आँखे बेक़रारी है चेहरे पे छाई,
छोड़ दो देना झूठी तसल्ली इश्क की चोट खाए हुवे है ........