सजा को मेने रजा पे छोड़ दिया,
हर एक काम मेंने खुदा पे छोड़ दिया,
*
वोह मुझे याद रखे या भुला दे,
उसी का काम था उसी की रजा पे छोड़ दिया,
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उसी की मर्ज़ी बुझा दे या जला दे,
चिराग मैंने जला के हवा पे छोड़ दिया,
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उस से बात भी करते तो किस तरह करते,
ये मसला दुआ का था दुआ पे छोड़ दिया,
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इसीलिए तो कहते हें बेवफा हमको,
हमने सारा ज़माना वफ़ा पे छोड़ दिया.....
5 comments:
Geat Shayari:
dil ko choo jata hai ak ak shabd.
vebafa to vo log hai!
jo ap ko sagh nahi pate!!
log apko yad kare ya na kare!
ap unehe yad karte hai !!
har kam apne khuda pe choda hai!
ye har kisi ki bas ki bat nahi hai !!
you are a GREAT person
Thanks a lott Dear Ujagir!!
to understand my feeling.
IS QADAR AADAT PADI HAI AANKHEIN BHIGONE KI
KE EK DIN RONA NA AAYA TO AANKHEIN PARESHAN HO GAYImultoj
Meray Lahu Ka Na_Ilzam Aaye Uss Pe Kahin
Issi Liye Woh Qatra Qatra Meri Jaan Leta Hai ....
श्री रजनीश जी,
बहुत बहुत शुक्रिया.....यह दो लाईनें मेरी तरफ़ से......
मायूसियों को मिटा दो दामन से......
"गम की अंधेरी रात में दिल को न बेकरार कर,
वो सुबह जरूर आएगी उस सुबह का इंतजार कर"
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